उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीके चरित्र सुनते-सुनते जो तृप्त हो जाते हैं (बस कर देते हैं), उन्होंने तो उसका विशेष रस जाना ही नहीं। जो जीवन्मुक्त महामुनि हैं, वे भी भगवान्के गुण निरन्तर सुनते रहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 959 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं।।
जीवनमुक्त महामुनि जेऊ। हरि गुन सुनहीं निरंतर तेऊ।।
स्रोत अभिलेख 7.53 · पुस्तक पृ. 959, 959
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम चरित जे सुनत अघाहीं। रस बिसेष जाना तिन्ह नाहीं।।
English explanation
AI-generated draft: Those who have had enough of hearing Rama’s deeds have not known their distinctive savor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरित | चरित; जीवन और कर्म | deeds and life story |
| जे | जो लोग | those who |
| सुनत | सुनते हुए | while listening |
| अघाहीं | तृप्त हो जाते हैं; और सुनना नहीं चाहते | have had enough; desire no more |
| रस | रस; आस्वादन का आनंद | savor; delight in experiencing |
| बिसेष | विशेष; विशिष्ट | distinctive; special |
| जाना | जाना; अनुभव किया | known; experienced |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| नाहीं | नहीं | not |
2 जीवनमुक्त महामुनि जेऊ। हरि गुन सुनहीं निरंतर तेऊ।।
English explanation
Even the great sages who are liberated while living continually listen to Hari’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीवनमुक्त | जीते-जी मुक्त | liberated while still living |
| महामुनि | महान मुनि | great sages |
| जेऊ | जो भी | those who, even |
| हरि | भगवान हरि के | of Lord Hari |
| गुन | गुण | virtues |
| सुनहीं | सुनते हैं | listen to |
| निरंतर | लगातार | continually |
| तेऊ | वे भी | they too |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 959
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 959, 959
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।