उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भव सागर चह पार जो पावा। राम कथा ता कहँ दृढ़ नावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो संसाररूपी सागरका पार पाना चाहता है, उसके लिये तो श्रीरामजीकी कथा दृढ़ नौकाके समान है। श्रीहरिके गुणसमूह तो विषयी लोगोंके लिये भी कानोंको सुख देनेवाले और मनको आनन्द देनेवाले हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 959 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भव सागर चह पार जो पावा। राम कथा ता कहँ दृढ़ नावा।।
बिषइन्ह कहँ पुनि हरि गुन ग्रामा। श्रवन सुखद अरु मन अभिरामा।।
स्रोत अभिलेख 7.53 · पुस्तक पृ. 959, 959
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भव सागर चह पार जो पावा। राम कथा ता कहँ दृढ़ नावा।।
English explanation
For whoever wishes to cross the ocean of worldly existence, Rama’s story is a sturdy boat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार; जन्म-मरण का अस्तित्व | worldly existence; birth and death |
| सागर | सागर | ocean |
| चह | चाहता है | wishes |
| पार | दूसरा किनारा | the farther shore |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| पावा | पाना; पहुँच पाना | to reach; to attain |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कथा | कथा | story |
| ता | उस व्यक्ति | that person |
| कहँ | के लिए | for |
| दृढ़ | मजबूत | sturdy |
| नावा | नाव | boat |
2 बिषइन्ह कहँ पुनि हरि गुन ग्रामा। श्रवन सुखद अरु मन अभिरामा।।
English explanation
For those attached to sense pleasures too, the multitude of Hari’s virtues delights the ears and charms the mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषइन्ह | विषय-सुखों में आसक्त लोगों | people attached to sense pleasures |
| कहँ | के लिए | for |
| पुनि | फिर; भी | further; also |
| हरि | भगवान हरि के | of Lord Hari |
| गुन | गुण | virtues |
| ग्रामा | समूह; समुदाय | multitude; collection |
| श्रवन | कानों को; सुनने में | to the ears; in hearing |
| सुखद | सुख देने वाला | delightful; giving pleasure |
| अरु | और | and |
| मन | मन को | to the mind |
| अभिरामा | मनोहर; रमणीय | charming; pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 959
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 959, 959
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।