उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम करहिं भ्रातन्ह पर प्रीती। नाना भाँति सिखावहिं नीती।।
मूल पाठ
राम करहिं भ्रातन्ह पर प्रीती। नाना भाँति सिखावहिं नीती।।
हरषित रहहिं नगर के लोगा। करहिं सकल सुर दुर्लभ भोगा।।
स्रोत अभिलेख 7.25 · पुस्तक पृ. 934, 935
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजी भी भाइयोंपर प्रेम करते हैं और उन्हें नाना प्रकारकी नीतियाँ सिखलाते हैं। नगरके लोग हॢषत रहते हैं और सब प्रकारके देवदुर्लभ (देवताओंको भी कठिनतासे प्राप्त होने योग्य) भोग भोगते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 934 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम करहिं भ्रातन्ह पर प्रीती। नाना भाँति सिखावहिं नीती।।
English explanation
Rama loves his brothers and teaches them right conduct in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| करहिं | करते हैं | show, practice |
| भ्रातन्ह | भाइयों | the brothers |
| पर | के प्रति | toward |
| प्रीती | प्रेम | love |
| नाना | अनेक | various |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| सिखावहिं | सिखाते हैं | teach |
| नीती | नीति, उचित आचरण | ethical wisdom, right conduct |
2 हरषित रहहिं नगर के लोगा। करहिं सकल सुर दुर्लभ भोगा।।
English explanation
The city’s people remain happy and enjoy every pleasure that is rare even for the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषित | प्रसन्न | happy |
| रहहिं | रहते हैं | remain |
| नगर | नगर, अयोध्या | the city, Ayodhya |
| के | के | of |
| लोगा | लोग | people |
| करहिं | उपभोग करते हैं | enjoy |
| सकल | सभी | all |
| सुर | देवताओं के लिए भी | even for the gods |
| दुर्लभ | दुर्लभ | hard to obtain |
| भोगा | सुख, भोग | pleasures, enjoyments |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 934
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 934, 935
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।