उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहे ब्यापि समस्त जग माहीं। तेहि गिरि निकट कबहुँ नहिं जाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो सारे जगत्में छा रहे हैं, उस पर्वतके पास भी कभी नहीं फटकते। वहाँ बसकर जिस प्रकार वह काक हरिको भजता है, हे उमा! उसे प्रेमसहित सुनो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 962 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रहे ब्यापि समस्त जग माहीं। तेहि गिरि निकट कबहुँ नहिं जाहीं।।
तहँ बसि हरिहि भजइ जिमि कागा। सो सुनु उमा सहित अनुरागा।।
स्रोत अभिलेख 7.57 · पुस्तक पृ. 962, 962
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रहे ब्यापि समस्त जग माहीं। तेहि गिरि निकट कबहुँ नहिं जाहीं।।
English explanation
These pervade the entire world, but never go near that mountain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहे | रहते हैं | remain |
| ब्यापि | व्याप्त होकर | pervading |
| समस्त | सम्पूर्ण | entire |
| जग | संसार | world |
| माहीं | में | in |
| तेहि | उस | that |
| गिरि | पर्वत के | mountain |
| निकट | पास | near |
| कबहुँ | कभी | ever |
| नहिं | नहीं | not |
| जाहीं | जाते हैं | go |
2 तहँ बसि हरिहि भजइ जिमि कागा। सो सुनु उमा सहित अनुरागा।।
English explanation
Uma, listen with loving attention to how that crow worships Hari while dwelling there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| बसि | रहकर | dwelling |
| हरिहि | हरि को | Hari, the Lord |
| भजइ | भजता है | worships |
| जिमि | जिस प्रकार | in the manner that |
| कागा | कौआ, काकभुशुंडि | the crow, Kakabhushundi |
| सो | वह बात | that account |
| सुनु | सुनो | listen |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| सहित | साथ | with |
| अनुरागा | प्रेम के | loving devotion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 962
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 962, 962
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।