उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहेउ एक दिन अवधि अधारा। समुझत मन दुख भयउ अपारा।।
मूल पाठ
रहेउ एक दिन अवधि अधारा। समुझत मन दुख भयउ अपारा।।
कारन कवन नाथ नहिं आयउ। जानि कुटिल किधौं मोहि बिसरायउ।।
स्रोत अभिलेख 7.1 · पुस्तक पृ. 906, 907
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्राणोंकी आधाररूप अवधिका एक ही दिन शेष रह गया। यह सोचते ही भरतजीके मनमें अपार दु:ख हुआ। क्या कारण हुआ कि नाथ नहीं आये? प्रभुने कुटिल जानकर मुझे कहीं भुला तो नहीं दिया?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 906 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रहेउ एक दिन अवधि अधारा। समुझत मन दुख भयउ अपारा।।
English explanation
AI draft: Only one day remained of the appointed period that sustained Bharata’s life. Thinking of this, he felt boundless sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहेउ | शेष रहा | remained |
| एक | एक | one |
| दिन | दिन | day |
| अवधि | निर्धारित अवधि | the appointed period |
| अधारा | जीवन का आधार | support of life |
| समुझत | सोचते ही | on considering this |
| मन | मन में | in his heart |
| दुख | दुःख | sorrow |
| भयउ | हुआ | arose |
| अपारा | अपार | boundless |
2 कारन कवन नाथ नहिं आयउ। जानि कुटिल किधौं मोहि बिसरायउ।।
English explanation
Why has my lord not returned? Perhaps he has judged me deceitful and forgotten me?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कारन | कारण | reason |
| कवन | किस | what |
| नाथ | स्वामी राम | my lord Rama |
| नहिं | नहीं | not |
| आयउ | आए | returned |
| जानि | समझकर | considering |
| कुटिल | कुटिल | deceitful |
| किधौं | कहीं ऐसा तो नहीं कि | could it be that |
| मोहि | मुझे | me |
| बिसरायउ | भुला दिया | has forgotten |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 906
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 906, 907
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।