उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अहह धन्य लछिमन बड़भागी। राम पदारबिंदु अनुरागी।।
मूल पाठ
अहह धन्य लछिमन बड़भागी। राम पदारबिंदु अनुरागी।।
कपटी कुटिल मोहि प्रभु चीन्हा। ताते नाथ संग नहिं लीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 7.1 · पुस्तक पृ. 906, 907
भावार्थ
मूल पाठ के बादअहा हा! लक्ष्मण बड़े धन्य एवं बड़भागी हैं, जो श्रीरामचन्द्रजीके चरणारविन्दके प्रेमी हैं (अर्थात् उनसे अलग नहीं हुए)। मुझे तो प्रभुने कपटी और कुटिल पहचान लिया, इसीसे नाथने मुझे साथ नहीं लिया!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 906 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अहह धन्य लछिमन बड़भागी। राम पदारबिंदु अनुरागी।।
English explanation
Ah! Blessed and greatly fortunate is Lakshmana, devoted to Rama’s lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहह | अहह! | Ah! |
| धन्य | धन्य | blessed |
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| बड़भागी | अत्यंत भाग्यशाली | greatly fortunate |
| राम | राम के | Rama’s |
| पदारबिंदु | चरणकमलों में | in the lotus feet |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाले | lovingly devoted |
2 कपटी कुटिल मोहि प्रभु चीन्हा। ताते नाथ संग नहिं लीन्हा।।
English explanation
The Lord judged me hypocritical and deceitful; that is why he did not take me with him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपटी | कपट करने वाला | hypocritical |
| कुटिल | कुटिल | deceitful |
| मोहि | मुझे | me |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| चीन्हा | समझा | judged to be |
| ताते | इसलिए | therefore |
| नाथ | स्वामी ने | my lord |
| संग | अपने साथ | with him |
| नहिं | नहीं | not |
| लीन्हा | ले गए | took |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 906
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 906, 907
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।