उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुपति भगति सजीवन मूरी। अनूपान श्रद्धा मति पूरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजीकी भक्ति संजीवनी जड़ी है। श्रद्धासे पूर्ण बुद्धि ही अनुपान (दवाके साथ लिया जानेवाला मधु आदि) है। इस प्रकारका संयोग हो तो वे रोग भले ही नष्ट हो जायँ, नहीं तो करोड़ों प्रयत्नोंसे भी नहीं जाते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1036 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रघुपति भगति सजीवन मूरी। अनूपान श्रद्धा मति पूरी।।
एहि बिधि भलेहिं सो रोग नसाहीं। नाहिं त जतन कोटि नहिं जाहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.122 · पुस्तक पृ. 1036, 1038
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रघुपति भगति सजीवन मूरी। अनूपान श्रद्धा मति पूरी।।
English explanation
Devotion to Rama is the life-restoring herb; a mind filled with faith is the accompanying medicinal draught.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम की | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| भगति | भक्ति | devotion |
| सजीवन | जीवन पुनः देने वाली | life-restoring |
| मूरी | औषधीय बूटी | medicinal herb |
| अनूपान | औषधि के साथ लिया जाने वाला पेय | draught taken with medicine |
| श्रद्धा | श्रद्धा से | with faith |
| मति | बुद्धि | mind |
| पूरी | पूरी भरी हुई | fully imbued |
2 एहि बिधि भलेहिं सो रोग नसाहीं। नाहिं त जतन कोटि नहिं जाहीं।।
English explanation
By this method those maladies are thoroughly destroyed; otherwise, even countless efforts do not remove them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | विधि से | by the method |
| भलेहिं | भलीभाँति, निश्चय ही | thoroughly, indeed |
| सो | वे | those |
| रोग | रोग | maladies |
| नसाहीं | नष्ट होते हैं | are destroyed |
| नाहिं | नहीं तो | if not |
| त | तो | then |
| जतन | प्रयत्नों से | through efforts |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions of |
| नहिं | नहीं | not |
| जाहीं | जाते हैं | go away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1036
- सहायक विषय
- भजन-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1036, 1038
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।