उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोह न अंध कीन्ह केहि केही। को जग काम नचाव न जेही।।
मूल पाठ
मोह न अंध कीन्ह केहि केही। को जग काम नचाव न जेही।।
तृस्नाँ केहि न कीन्ह बौराहा। केहि कर हृदय क्रोध नहिं दाहा।।
स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 973, 973
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनमेंसे भी किस-किसको मोहने अंधा (विवेकशून्य) नहीं किया? जगत्में ऐसा कौन है जिसे कामने न नचाया हो? तृष्णाने किसको मतवाला नहीं बनाया? क्रोधने किसका हृदय नहीं जलाया?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 973 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मोह न अंध कीन्ह केहि केही। को जग काम नचाव न जेही।।
English explanation
Whom has delusion not blinded? Who in the world is not made to dance by desire?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह | मोह ने | delusion |
| न | नहीं | not |
| अंध | अंधा; विवेकहीन | blind; bereft of discernment |
| कीन्ह | किया | made |
| केहि | किसको | whom |
| केही | किसको | whom |
| को | कौन | who |
| जग | संसार में | in the world |
| काम | काम; कामना | desire; lust |
| नचाव | नचाता है; वश में चलाता है | makes dance; controls |
| न | नहीं | not |
| जेही | जिसे | whom |
2 तृस्नाँ केहि न कीन्ह बौराहा। केहि कर हृदय क्रोध नहिं दाहा।।
English explanation
Whom has craving not driven mad? Whose heart has anger not burned?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तृस्नाँ | तृष्णा ने; अतृप्त चाह ने | craving; insatiable longing |
| केहि | किसे | whom |
| न | नहीं | not |
| कीन्ह | किया | made |
| बौराहा | बावला; पागल | mad |
| केहि | किस | whose |
| कर | का | of |
| हृदय | हृदय | heart |
| क्रोध | क्रोध ने | anger |
| नहिं | नहीं | not |
| दाहा | जलाया | burned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 973
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 973, 973
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