उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह निज मोह कही खग साईं। सो नहिं कछु आचरज गोसाईं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे पक्षियोंके स्वामी! आपने अपना मोह कहा, सो हे गोसाईं! यह कुछ आश्चर्य नहीं है। नारदजी, शिवजी, ब्रह्माजी और सनकादि जो आत्मतत्त्वके मर्मज्ञ और उसका उपदेश करनेवाले श्रेष्ठ मुनि हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 973 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्ह निज मोह कही खग साईं। सो नहिं कछु आचरज गोसाईं।।
नारद भव बिरंचि सनकादी। जे मुनिनायक आतमबादी।।
स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 973, 973
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुम्ह निज मोह कही खग साईं। सो नहिं कछु आचरज गोसाईं।।
English explanation
O lord of birds, what you said about your own delusion is not at all surprising, my lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आपने | you |
| निज | अपना | your own |
| मोह | मोह; भ्रम | delusion |
| कही | कहा; वर्णन किया | told; described |
| खग | पक्षियों के | of birds |
| साईं | हे स्वामी | O lord |
| सो | वह बात | that matter |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | at all |
| आचरज | आश्चर्य | surprise |
| गोसाईं | हे स्वामी | O master |
2 नारद भव बिरंचि सनकादी। जे मुनिनायक आतमबादी।।
English explanation
Narada, Shiva, Brahma, and Sanaka and the other sages—who are foremost among sages and expound the nature of the Self—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| भव | शिव | Shiva |
| बिरंचि | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| सनकादी | सनक और उनके समान अन्य ऋषि | Sanaka and the other sages of his group |
| जे | जो | who |
| मुनिनायक | मुनियों में प्रमुख | foremost among sages |
| आतमबादी | आत्मतत्त्व का विवेचन करने वाले | expounders of the nature of the Self |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 973
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 973, 973
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।