उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्हहि न संसय मोह न माया। मो पर नाथ कीन्ह तुम्ह दाया।।
मूल पाठ
तुम्हहि न संसय मोह न माया। मो पर नाथ कीन्ह तुम्ह दाया।।
पठइ मोह मिस खगपति तोही। रघुपति दीन्हि बड़ाई मोही।।
स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 973, 973
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपको न सन्देह है और न मोह अथवा माया ही है। हे नाथ! आपने तो मुझपर दया की है। हे पक्षिराज! मोहके बहाने श्रीरघुनाथजीने आपको यहाँ भेजकर मुझे बड़ाई दी है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 973 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुम्हहि न संसय मोह न माया। मो पर नाथ कीन्ह तुम्ह दाया।।
English explanation
You have neither doubt nor delusion nor illusion; my lord, you have shown mercy to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हहि | आपको | to you |
| न | नहीं | no; not |
| संसय | संदेह | doubt |
| मोह | मोह; विवेक को ढकने वाला भ्रम | delusion |
| न | नहीं | no; not |
| माया | माया; भ्रमकारी प्रभाव | illusion; delusive influence |
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | upon |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| कीन्ह | की | showed; performed |
| तुम्ह | आपने | you |
| दाया | दया | mercy |
2 पठइ मोह मिस खगपति तोही। रघुपति दीन्हि बड़ाई मोही।।
English explanation
O king of birds, by sending you under the pretext of delusion, Rama has honored me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पठइ | भेजकर | having sent |
| मोह | मोह; भ्रम | delusion |
| मिस | के बहाने | under the pretext of |
| खगपति | हे पक्षियों के स्वामी गरुड़ | O Garuda, lord of birds |
| तोही | आपको | you |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम ने | Rama, lord of the Raghu lineage |
| दीन्हि | दी | gave |
| बड़ाई | सम्मान; गौरव | honor; distinction |
| मोही | मुझे | to me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 973
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 973, 973
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।