उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बोलेउ काकभसुंड बहोरी। नभग नाथ पर प्रीति न थोरी।।
मूल पाठ
बोलेउ काकभसुंड बहोरी। नभग नाथ पर प्रीति न थोरी।।
सब बिधि नाथ पूज्य तुम्ह मेरे। कृपापात्र रघुनायक केरे।।
स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 973, 973
भावार्थ
मूल पाठ के बादकाकभुशुण्डिजीने फिर कहा—पक्षिराजपर उनका प्रेम कम न था (अर्थात् बहुत था)—हे नाथ! आप सब प्रकारसे मेरे पूज्य हैं और श्रीरघुनाथजीके कृपापात्र हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 973 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बोलेउ काकभसुंड बहोरी। नभग नाथ पर प्रीति न थोरी।।
English explanation
AI draft: Kakabhushundi spoke again. His love for Garuda, lord of birds, was far from slight (the reading ‘नभग’ is uncertain).
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोलेउ | बोले | spoke |
| काकभसुंड | काकभुशुण्डि, काक रूप में रामकथा के वक्ता | Kakabhushundi, the crow-sage who narrates Rama’s story |
| बहोरी | फिर | again |
| नभग | पक्षी; यहाँ गरुड़, पक्षियों के स्वामी। | Bird; here Garuda, lord of birds. |
| नाथ | स्वामी, गरुड़ | lord, Garuda |
| पर | के प्रति | toward |
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ा; कम | slight; little |
2 सब बिधि नाथ पूज्य तुम्ह मेरे। कृपापात्र रघुनायक केरे।।
English explanation
My lord, you are worthy of my reverence in every way; you are a recipient of Rama’s grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब; प्रत्येक | every |
| बिधि | प्रकार से | in a way or respect |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| पूज्य | पूजनीय | worthy of reverence |
| तुम्ह | आप | you |
| मेरे | मेरे लिए | to me |
| कृपापात्र | कृपा के पात्र | recipient of grace |
| रघुनायक | रघुवंश के नायक राम | Rama, leader of the Raghu lineage |
| केरे | के | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 973
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 973, 973
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।