उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोहि सन करहीं बिबिध बिधि क्रीड़ा। बरनत मोहि होति अति ब्रीड़ा।।
मूल पाठ
मोहि सन करहीं बिबिध बिधि क्रीड़ा। बरनत मोहि होति अति ब्रीड़ा।।
किलकत मोहि धरन जब धावहिं। चलउँ भागि तब पूप देखावहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.77 · पुस्तक पृ. 979, 980
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर मुझसे बहुत प्रकारके खेल करते हैं, जिन चरित्रोंका वर्णन करते मुझे लज्जा आती है! किलकारी मारते हुए जब वे मुझे पकडऩे दौड़ते और मैं भाग चलता, तब मुझे पूआ दिखलाते थे॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 980 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोहि सन करहीं बिबिध बिधि क्रीड़ा। बरनत मोहि होति अति ब्रीड़ा।।
English explanation
He plays with me in many ways. I feel great embarrassment in describing these games.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मेरे | me |
| सन | साथ | with |
| करहीं | करते हैं | does; performs |
| बिबिध | अनेक, विविध | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| क्रीड़ा | खेल | play; games |
| बरनत | वर्णन करते हुए | while describing |
| मोहि | मुझे | to me |
| होति | होती है | arises; is felt |
| अति | बहुत | great; much |
| ब्रीड़ा | लज्जा, संकोच | embarrassment; bashfulness |
2 किलकत मोहि धरन जब धावहिं। चलउँ भागि तब पूप देखावहिं।।
English explanation
When he runs to catch me, crying out with delight, I flee; then he shows me a sweet cake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| किलकत | किलकारी भरते हुए | crying out with delight |
| मोहि | मुझे | me |
| धरन | पकड़ने के लिए | to catch |
| जब | जब | when |
| धावहिं | दौड़ते हैं | runs |
| चलउँ | मैं चला जाता हूँ | I go away |
| भागि | भागकर | fleeing |
| तब | तब | then |
| पूप | पूआ, मीठा पकवान | a sweet fried cake |
| देखावहिं | दिखाते हैं | shows me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 980
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 979, 980
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।