उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पीत झीनि झगुली तन सोही। किलकनि चितवनि भावति मोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपीली और महीन झँगुली शरीरपर शोभा दे रही है। उनकी किलकारी और चितवन मुझे बहुत ही प्रिय लगती है। राजा दशरथजीके आँगनमें विहार करनेवाले रूपकी राशि श्रीरामचन्द्रजी अपनी परछाहीं देखकर नाचते हैं,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 980 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पीत झीनि झगुली तन सोही। किलकनि चितवनि भावति मोही।।
रूप रासि नृप अजिर बिहारी। नाचहिं निज प्रतिबिंब निहारी।।
स्रोत अभिलेख 7.77 · पुस्तक पृ. 979, 980
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पीत झीनि झगुली तन सोही। किलकनि चितवनि भावति मोही।।
English explanation
A fine yellow infant’s tunic adorns his body. His delighted cries and glances please me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पीत | पीली | yellow |
| झीनि | महीन, हल्की | fine; light |
| झगुली | शिशु का ढीला वस्त्र | an infant’s loose tunic |
| तन | शरीर पर | on the body |
| सोही | शोभित है | looks lovely |
| किलकनि | किलकारी | delighted baby cries |
| चितवनि | देखने की अदा, दृष्टि | glances; manner of looking |
| भावति | प्रिय लगती है | pleases |
| मोही | मुझे | me |
2 रूप रासि नृप अजिर बिहारी। नाचहिं निज प्रतिबिंब निहारी।।
English explanation
Child Rama, a treasury of beauty, plays in the king’s courtyard and dances on seeing his own reflection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रूप | सुंदरता | beauty |
| रासि | भंडार, राशि | treasury; abundance |
| नृप | राजा के | the king’s |
| अजिर | आँगन में | in the courtyard |
| बिहारी | विचरण करने वाले | one who roams or plays |
| नाचहिं | नाचते हैं | dances |
| निज | अपना | his own |
| प्रतिबिंब | प्रतिबिंब | reflection |
| निहारी | देखकर | on seeing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 980
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 979, 980
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