उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोर हंस सारस पारावत। भवननि पर सोभा अति पावत।।
मूल पाठ
मोर हंस सारस पारावत। भवननि पर सोभा अति पावत।।
जहँ तहँ देखहिं निज परिछाहीं। बहु बिधि कूजहिं नृत्य कराहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.28 · पुस्तक पृ. 937, 937
भावार्थ
मूल पाठ के बादमोर, हंस, सारस और कबूतर घरोंके ऊपर बड़ी ही शोभा पाते हैं। वे पक्षी [मणियोंकी दीवारोंमें और छतमें] जहाँ-तहाँ अपनी परछाईं देखकर [वहाँ दूसरे पक्षी समझकर] बहुत प्रकारसे मधुर बोली बोलते और नृत्य करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 937 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मोर हंस सारस पारावत। भवननि पर सोभा अति पावत।।
English explanation
Peacocks, swans, cranes, and pigeons look splendid upon the buildings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मोर | peacocks |
| हंस | हंस पक्षी | swans |
| सारस | सारस पक्षी | cranes |
| पारावत | कबूतर | pigeons |
| भवननि | भवनों | buildings |
| पर | पर | upon |
| सोभा | शोभा | splendor |
| अति | अत्यधिक | great |
| पावत | पाते हैं; शोभायमान होते हैं | attain; display |
2 जहँ तहँ देखहिं निज परिछाहीं। बहु बिधि कूजहिं नृत्य कराहीं।।
English explanation
Here and there they see their own reflections, call in many ways, and dance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; वहाँ | there |
| देखहिं | देखते हैं | see |
| निज | अपनी | their own |
| परिछाहीं | परछाईं; प्रतिबिंब | reflections |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| कूजहिं | कूजते हैं | warble or coo |
| नृत्य | नृत्य | dancing |
| कराहीं | करते हैं | perform |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 937
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 937, 937
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