उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं जिमि कथा सुनी भव मोचनि। सो प्रसंग सुनु सुमुखि सुलोचनि।।
मूल पाठ
मैं जिमि कथा सुनी भव मोचनि। सो प्रसंग सुनु सुमुखि सुलोचनि।।
प्रथम दच्छ गृह तव अवतारा। सती नाम तब रहा तुम्हारा।।
स्रोत अभिलेख 7.56 · पुस्तक पृ. 961, 962
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैंने जिस प्रकार वह भव (जन्म-मृत्यु) से छुड़ानेवाली कथा सुनी, हे सुमुखी! हे सुलोचनी! वह प्रसंग सुनो। पहले तुम्हारा अवतार दक्षके घर हुआ था। तब तुम्हारा नाम सती था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 961 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मैं जिमि कथा सुनी भव मोचनि। सो प्रसंग सुनु सुमुखि सुलोचनि।।
English explanation
AI draft: Hear, O fair-faced, beautiful-eyed Parvati, the account of how I heard the story that frees one from worldly bondage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैंने (शिव ने) | I (Shiva) |
| जिमि | जिस प्रकार | in the way that |
| कथा | कथा | the story |
| सुनी | सुनी | heard |
| भव | संसार का बंधन | worldly bondage |
| मोचनि | मुक्त करने वाली | that releases one from |
| सो | वह | that |
| प्रसंग | प्रसंग; वृत्तांत | account; episode |
| सुनु | सुनो | listen to |
| सुमुखि | हे सुंदर मुख वाली | O fair-faced one |
| सुलोचनि | हे सुंदर नेत्रों वाली | O beautiful-eyed one |
2 प्रथम दच्छ गृह तव अवतारा। सती नाम तब रहा तुम्हारा।।
English explanation
Previously you were born in Daksha’s household; your name then was Sati.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | previously |
| दच्छ | दक्ष प्रजापति के | of Daksha, the progenitor |
| गृह | घर में | in the household |
| तव | तुम्हारा | your |
| अवतारा | जन्म हुआ | birth took place |
| सती | सती, शिव की पूर्व पत्नी | Sati, Shiva’s former wife |
| नाम | नाम | name |
| तब | उस समय | then |
| रहा | था | was |
| तुम्हारा | तुम्हारा | yours |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 961
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 961, 962
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।