उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दच्छ जग्य तब भा अपमाना। तुम्ह अति क्रोध तजे तब प्राना।।
मूल पाठ
दच्छ जग्य तब भा अपमाना। तुम्ह अति क्रोध तजे तब प्राना।।
मम अनुचरन्ह कीन्ह मख भंगा। जानहु तुम्ह सो सकल प्रसंगा।।
स्रोत अभिलेख 7.56 · पुस्तक पृ. 961, 962
भावार्थ
मूल पाठ के बाददक्षके यज्ञमें तुम्हारा अपमान हुआ। तब तुमने अत्यन्त क्रोध करके प्राण त्याग दिये थे; और फिर मेरे सेवकोंने यज्ञ विध्वंस कर दिया था। वह सारा प्रसंग तुम जानती ही हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 961 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दच्छ जग्य तब भा अपमाना। तुम्ह अति क्रोध तजे तब प्राना।।
English explanation
An insult occurred at Daksha’s sacrifice; in great anger, you then gave up your life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दच्छ | दक्ष के | Daksha’s |
| जग्य | यज्ञ में | at the sacrifice |
| तब | तब | then |
| भा | हुआ | occurred |
| अपमाना | अपमान | an insult |
| तुम्ह | तुमने | you |
| अति | अत्यंत | extreme |
| क्रोध | क्रोध में | in anger |
| तजे | त्याग दिए | gave up |
| तब | तब | then |
| प्राना | प्राण | your life |
2 मम अनुचरन्ह कीन्ह मख भंगा। जानहु तुम्ह सो सकल प्रसंगा।।
English explanation
My attendants destroyed the sacrifice; you know that entire episode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| अनुचरन्ह | अनुचरों ने | attendants |
| कीन्ह | किया | caused |
| मख | यज्ञ का | of the sacrifice |
| भंगा | विध्वंस | destruction |
| जानहु | जानती हो | know |
| तुम्ह | तुम | you |
| सो | वह | that |
| सकल | संपूर्ण | entire |
| प्रसंगा | प्रसंग | episode |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 961
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 961, 962
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।