उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब अति सोच भयउ मन मोरें। दुखी भयउँ बियोग प्रिय तोरें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब मेरे मनमें बड़ा सोच हुआ और हे प्रिये! मैं तुम्हारे वियोगसे दुखी हो गया। मैं विरक्तभावसे सुन्दर वन, पर्वत, नदी और तालाबोंका कौतुक (दृश्य) देखता फिरता था॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 961 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब अति सोच भयउ मन मोरें। दुखी भयउँ बियोग प्रिय तोरें।।
सुंदर बन गिरि सरित तड़ागा। कौतुक देखत फिरउँ बेरागा।।
स्रोत अभिलेख 7.56 · पुस्तक पृ. 961, 962
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब अति सोच भयउ मन मोरें। दुखी भयउँ बियोग प्रिय तोरें।।
English explanation
Then great sorrow arose in my heart; beloved, I became unhappy at separation from you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| अति | बहुत | great |
| सोच | शोक | sorrow |
| भयउ | हुआ | arose |
| मन | मन में | in the heart |
| मोरें | मेरे | my |
| दुखी | दुखी | unhappy |
| भयउँ | मैं हो गया | I became |
| बियोग | वियोग से | through separation |
| प्रिय | हे प्रिये | O beloved |
| तोरें | तुम्हारे | from you |
2 सुंदर बन गिरि सरित तड़ागा। कौतुक देखत फिरउँ बेरागा।।
English explanation
Detached, I wandered, viewing the wonders of beautiful forests, mountains, rivers, and ponds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| बन | वन | forests |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| सरित | नदियाँ | rivers |
| तड़ागा | तालाब | ponds |
| कौतुक | रमणीय दृश्य; कौतुक | wondrous sights |
| देखत | देखते हुए | viewing |
| फिरउँ | मैं घूमता था | I wandered |
| बेरागा | विरक्त होकर | in detachment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 961
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 961, 962
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।