उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मन गोतीत अमल अबिनासी। निर्बिकार निरवधि सुख रासी।।
मूल पाठ
मन गोतीत अमल अबिनासी। निर्बिकार निरवधि सुख रासी।।
सो तैं ताहि तोहि नहिं भेदा। बारि बीचि इव गावहि बेदा।।
स्रोत अभिलेख 7.111 · पुस्तक पृ. 1016, 1018
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह मन और इन्द्रियोंसे परे, निर्मल, विनाशरहित, निर्विकार, सीमारहित और सुखकी राशि है। वेद ऐसा गाते हैं कि वही तू है (तत्त्वमसि), जल और जलकी लहरकी भाँति उसमें और तुझमें कोई भेद नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1017 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मन गोतीत अमल अबिनासी। निर्बिकार निरवधि सुख रासी।।
English explanation
It is beyond mind and speech, pure, imperishable, changeless, boundless, and an abundance of bliss.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | the mind |
| गोतीत | वाणी से परे | beyond speech |
| अमल | निर्मल | pure |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
| निर्बिकार | विकाररहित | changeless |
| निरवधि | असीम | boundless |
| सुख | सुख की | of bliss |
| रासी | राशि; अपार भंडार | an abundance |
2 सो तैं ताहि तोहि नहिं भेदा। बारि बीचि इव गावहि बेदा।।
English explanation
You are that very Brahman; there is no difference between it and you. The Vedas proclaim this likeness to water and its wave.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही ब्रह्म | that very Brahman |
| तैं | तुम हो | you are |
| ताहि | उसमें | in that |
| तोहि | तुममें | in you |
| नहिं | नहीं | no |
| भेदा | भेद | difference |
| बारि | जल | water |
| बीचि | तरंग | wave |
| इव | के समान | like |
| गावहि | कहते हैं | proclaim |
| बेदा | वेद | the Vedas |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1017
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1016, 1018
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।