उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मच्छर काहि कलंक न लावा। काहि न सोक समीर डोलावा।।
मूल पाठ
मच्छर काहि कलंक न लावा। काहि न सोक समीर डोलावा।।
चिंता साँपिनि को नहिं खाया। को जग जाहि न ब्यापी माया।।
स्रोत अभिलेख 7.71 · पुस्तक पृ. 974, 974
भावार्थ
मूल पाठ के बादमत्सर (डाह) ने किसको कलङ्क नहीं लगाया? शोकरूपी पवनने किसे नहीं हिला दिया? चिन्तारूपी साँपिनने किसे नहीं खा लिया? जगत्में ऐसा कौन है, जिसे माया न व्यापी हो?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 974 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मच्छर काहि कलंक न लावा। काहि न सोक समीर डोलावा।।
English explanation
Whom has envy not stained with disgrace? Whom has the wind of sorrow not shaken?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मच्छर | ईर्ष्या | envy |
| काहि | किसे | whom |
| कलंक | कलंक | disgrace |
| न | नहीं | not |
| लावा | लगाया | marked with |
| काहि | किसे | whom |
| न | नहीं | not |
| सोक | शोक | sorrow |
| समीर | हवा | wind |
| डोलावा | डगमगाया | shaken |
2 चिंता साँपिनि को नहिं खाया। को जग जाहि न ब्यापी माया।।
English explanation
Whom has the she-serpent of worry not devoured? Who in the world has not been enveloped by illusion?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चिंता | चिंता | worry |
| साँपिनि | मादा साँप | she-serpent |
| को | किसे | whom |
| नहिं | नहीं | not |
| खाया | खा लिया | devoured |
| को | कौन | who |
| जग | संसार में | in the world |
| जाहि | जिसे | whom |
| न | नहीं | not |
| ब्यापी | व्याप्त हुई; घेर लिया | pervaded; enveloped |
| माया | माया; मोहकारी शक्ति | illusion; deluding power |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 974
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 974, 974
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