उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीट मनोरथ दारु सरीरा। जेहि न लाग घुन को अस धीरा।।
मूल पाठ
कीट मनोरथ दारु सरीरा। जेहि न लाग घुन को अस धीरा।।
सुत बित लोक ईषना तीनी। केहि के मति इन्ह कृत न मलीनी।।
स्रोत अभिलेख 7.71 · पुस्तक पृ. 974, 974
भावार्थ
मूल पाठ के बादमनोरथ कीड़ा है, शरीर लकड़ी है। ऐसा धैर्यवान् कौन है, जिसके शरीरमें यह कीड़ा न लगा हो? पुत्रकी, धनकी और लोकप्रतिष्ठाकी इन तीन प्रबल इच्छाओंने किसकी बुद्धिको मलिन नहीं कर दिया (बिगाड़ नहीं दिया)?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 974 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कीट मनोरथ दारु सरीरा। जेहि न लाग घुन को अस धीरा।।
English explanation
Desires are insects, and the body is wood. Who is so steadfast that the woodworm of desire has not infested them?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीट | कीड़े | insects |
| मनोरथ | इच्छाएँ और कामनाएँ | desires and wishes |
| दारु | लकड़ी | wood |
| सरीरा | शरीर | body |
| जेहि | जिसमें | in whom |
| न | नहीं | not |
| लाग | लगा | taken hold |
| घुन | लकड़ी खाने वाला कीड़ा | woodworm |
| को | कौन | who |
| अस | ऐसा | so; such |
| धीरा | धैर्यवान और स्थिर | steadfast and composed |
2 सुत बित लोक ईषना तीनी। केहि के मति इन्ह कृत न मलीनी।।
English explanation
These are the three cravings—for offspring, wealth, and worldly standing. Whose understanding have they not sullied?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र या संतान | sons or offspring |
| बित | धन | wealth |
| लोक | लोक-प्रतिष्ठा | worldly standing |
| ईषना | लालसा | craving |
| तीनी | तीनों | all three |
| केहि | किस | whose |
| के | की | of |
| मति | बुद्धि | understanding |
| इन्ह | इनके द्वारा | by these |
| कृत | की गई | made |
| न | नहीं | not |
| मलीनी | मलिन | sullied |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 974
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 974, 974
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।