उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भोजन करिअ तृपिति हित लागी। जिमि सो असन पचवै जठरागी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजैसे भोजन किया तो जाता है तृप्तिके लिये और उस भोजनको जठराग्रि अपने-आप (बिना हमारी चेष्टाके) पचा डालती है, ऐसी सुगम और परम सुख देनेवाली हरिभक्ति जिसे न सुहावे, ऐसा मूढ़ कौन होगा?॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1030 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भोजन करिअ तृपिति हित लागी। जिमि सो असन पचवै जठरागी।।
असि हरिभगति सुगम सुखदाई। को अस मूढ़ न जाहि सोहाई।।
स्रोत अभिलेख 7.119 · पुस्तक पृ. 1029, 1030
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भोजन करिअ तृपिति हित लागी। जिमि सो असन पचवै जठरागी।।
English explanation
Just as one eats for satisfaction, and the digestive fire digests that food.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोजन | भोजन | a meal |
| करिअ | किया जाता है | one takes |
| तृपिति | तृप्ति | satisfaction |
| हित | के प्रयोजन | for the purpose |
| लागी | के लिए | of |
| जिमि | जैसे | just as |
| सो | उस | that |
| असन | अन्न को | food |
| पचवै | पचा देती है | digests |
| जठरागी | पेट की पाचन-अग्नि | the digestive fire in the stomach |
2 असि हरिभगति सुगम सुखदाई। को अस मूढ़ न जाहि सोहाई।।
English explanation
Such devotion to Hari is easy to practice and brings happiness. Who could be so foolish as not to find it pleasing?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असि | ऐसी | such |
| हरिभगति | भगवान हरि की भक्ति | devotion to Lord Hari |
| सुगम | सहज; सुगमता से करने योग्य | easy to practice |
| सुखदाई | सुख देने वाली | bringing happiness |
| को | कौन | who |
| अस | ऐसा | so |
| मूढ़ | मूर्ख | foolish |
| न | नहीं | not |
| जाहि | जिसे | to whom |
| सोहाई | अच्छी लगे | seems pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1030
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1029, 1030
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