उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भुज बल बिपुल भार महि खंडित। खर दूषन बिराध बध पंडित।।
मूल पाठ
भुज बल बिपुल भार महि खंडित। खर दूषन बिराध बध पंडित।।
रावनारि सुखरूप भूपबर। जय दसरथ कुल कुमुद सुधाकर।।
स्रोत अभिलेख 7.51 · पुस्तक पृ. 957, 957
भावार्थ
मूल पाठ के बादअपने बाहुबलसे पृथ्वीके बड़े भारी बोझको नष्ट करनेवाले, खर-दूषण और विराधके वध करनेमें कुशल, रावणके शत्रु, आनन्दस्वरूप, राजाओंमें श्रेष्ठ और दशरथके कुलरूपी कुमुदिनीके चन्द्रमा श्रीरामजी! आपकी जय हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 957 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भुज बल बिपुल भार महि खंडित। खर दूषन बिराध बध पंडित।।
English explanation
With the strength of your arms you removed the earth’s immense burden; you are adept at slaying Khara, Dushana, and Viradha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुज | भुजाओं की | of your arms |
| बल | शक्ति से | with strength |
| बिपुल | विशाल | immense |
| भार | बोझ | burden |
| महि | पृथ्वी का | of the earth |
| खंडित | दूर किया हुआ | removed |
| खर | खर नामक राक्षस | Khara, a demon |
| दूषन | दूषण नामक राक्षस | Dushana, a demon |
| बिराध | विराध नामक राक्षस | Viradha, a demon |
| बध | वध में | in slaying |
| पंडित | निपुण | adept |
2 रावनारि सुखरूप भूपबर। जय दसरथ कुल कुमुद सुधाकर।।
English explanation
Victory to you, enemy of Ravana, embodiment of bliss and best of kings! You are the moon that makes the water lily of Dasharatha’s lineage bloom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावनारि | रावण के शत्रु | enemy of Ravana |
| सुखरूप | सुख के साकार रूप | embodiment of bliss |
| भूपबर | श्रेष्ठ राजा | best of kings |
| जय | आपकी जय हो | victory to you |
| दसरथ | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| कुल | वंशरूपी | lineage pictured as |
| कुमुद | रात में खिलने वाला कमल | night-blooming water lily |
| सुधाकर | उसे खिलाने वाले चंद्रमा | the moon that makes it bloom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 957
- सहायक विषय
- नारदजीका आना और स्तुति करके ब्रह्मलोकको लौट जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 957, 957
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।