उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जातुधान बरूथ बल भंजन। मुनि सज्जन रंजन अघ गंजन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआप राक्षसोंकी सेनाके बलको तोडऩेवाले हैं। मुनियों और संतजनोंको आनन्द देनेवाले और पापोंके नाश करनेवाले हैं। ब्राह्मणरूपी खेतीके लिये आप नये मेघसमूह हैं और शरणहीनोंको शरण देनेवाले तथा दीन जनोंको अपने आश्रयमें ग्रहण करनेवाले हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 957 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जातुधान बरूथ बल भंजन। मुनि सज्जन रंजन अघ गंजन।।
भूसुर ससि नव बृंद बलाहक। असरन सरन दीन जन गाहक।।
स्रोत अभिलेख 7.51 · पुस्तक पृ. 957, 957
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जातुधान बरूथ बल भंजन। मुनि सज्जन रंजन अघ गंजन।।
English explanation
You break the strength of demonic armies, delight sages and the virtuous, and destroy sins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जातुधान | राक्षसों के | of demons |
| बरूथ | सैन्य-दलों का | of military hosts |
| बल | शक्ति | strength |
| भंजन | तोड़ने वाले | breaker |
| मुनि | ऋषियों को | sages |
| सज्जन | सदाचारी लोगों को | virtuous people |
| रंजन | आनंद देने वाले | one who delights |
| अघ | पापों का | of sins |
| गंजन | नाश करने वाले | destroyer |
2 भूसुर ससि नव बृंद बलाहक। असरन सरन दीन जन गाहक।।
English explanation
You are like the moon to Brahmins and a nourishing cloud to clusters of young shoots; you shelter the shelterless and take the lowly into your care.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूसुर | ब्राह्मणों के लिए | for Brahmins |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| नव | नए, कोमल | new, tender |
| बृंद | समूह; यहाँ नव अंकुरों का | cluster; here, of young shoots |
| बलाहक | मेघ | cloud |
| असरन | आश्रयहीनों के | of the shelterless |
| सरन | आश्रय | refuge |
| दीन | दुःखी और असहाय | distressed and helpless |
| जन | लोगों को | people |
| गाहक | अपनाने वाले | one who takes into his care |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 957
- सहायक विषय
- नारदजीका आना और स्तुति करके ब्रह्मलोकको लौट जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 957, 957
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।