उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भव बारिधि कुंभज रघुनायक। सेवत सुलभ सकल सुख दायक।।
मूल पाठ
भव बारिधि कुंभज रघुनायक। सेवत सुलभ सकल सुख दायक।।
मन संभव दारुन दुख दारय। दीनबंधु समता बिस्तारय।।
स्रोत अभिलेख 7.35 · पुस्तक पृ. 943, 944
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रघुनाथजी! आप जन्म-मृत्युरूप समुद्रको सोखनेके लिये अगस्त्य मुनिके समान हैं। आप सेवा करनेमें सुलभ हैं तथा सब सुखोंके देनेवाले हैं। हे दीनबन्धो! मनसे उत्पन्न दारुण दु:खोंका नाश कीजिये और [हममें] समदृष्टिका विस्तार कीजिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 943 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भव बारिधि कुंभज रघुनायक। सेवत सुलभ सकल सुख दायक।।
English explanation
O Rama, leader of Raghu’s lineage, you are like Agastya to the ocean of worldly existence, readily accessible through service and the giver of all happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसाररूपी | of worldly existence |
| बारिधि | समुद्र | ocean |
| कुंभज | अगस्त्य ऋषि के समान सोखने वाले | like the ocean-drinking sage Agastya |
| रघुनायक | हे रघुवंश के नायक राम | O Rama, leader of Raghu’s lineage |
| सेवत | सेवा करने पर | when served |
| सुलभ | सहज प्राप्त होने वाले | readily accessible |
| सकल | समस्त | all |
| सुख | सुख | happiness |
| दायक | देने वाले | giver |
2 मन संभव दारुन दुख दारय। दीनबंधु समता बिस्तारय।।
English explanation
Destroy the severe sorrows arising from the mind. O friend of the afflicted, foster equanimity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | from the mind |
| संभव | उत्पन्न | arising |
| दारुन | भीषण | severe |
| दुख | दुःख | sorrow |
| दारय | विदीर्ण कीजिए, नष्ट कीजिए | rend, destroy |
| दीनबंधु | हे दीनों के मित्र | O friend of the afflicted |
| समता | समभाव | equanimity |
| बिस्तारय | बढ़ाइए, फैलाइए | foster, extend |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 943
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 943, 944
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।