उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आस त्रास इरिषादि निवारक। बिनय बिबेक बिरति बिस्तारक।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआप [विषयोंकी] आशा, भय और ईष्र्या आदिके निवारण करनेवाले हैं तथा विनय, विवेक और वैराग्यके विस्तार करनेवाले हैं। हे राजाओंके शिरोमणि एवं पृथ्वीके भूषण श्रीरामजी! संसृति (जन्म-मृत्युके प्रवाह)-रूपी नदीके लिये नौकारूप अपनी भक्ति प्रदान कीजिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 943 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आस त्रास इरिषादि निवारक। बिनय बिबेक बिरति बिस्तारक।।
भूप मौलि मन मंडन धरनी। देहि भगति संसृति सरि तरनी।।
स्रोत अभिलेख 7.35 · पुस्तक पृ. 943, 944
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आस त्रास इरिषादि निवारक। बिनय बिबेक बिरति बिस्तारक।।
English explanation
You dispel craving, fear, jealousy, and the like, and foster humility, discernment, and detachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आस | तृष्णा, लालसा | craving |
| त्रास | भय | fear |
| इरिषादि | ईर्ष्या आदि | jealousy and the like |
| निवारक | दूर करने वाले | remover |
| बिनय | विनम्रता | humility |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| बिस्तारक | बढ़ाने वाले | fosterer |
2 भूप मौलि मन मंडन धरनी। देहि भगति संसृति सरि तरनी।।
English explanation
O jewel adorning kings’ crowns and ornament of the earth, grant devotion, the boat across the river of worldly existence. The supplied ‘मन’ is uncertain; the first half is interpreted provisionally on a possible reading ‘मनि’.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजाओं के | of kings |
| मौलि | मुकुट | crowns |
| मन | मणि; राजाओं के मुकुटों को सुशोभित करने वाला रत्न। | Jewel; the gem adorning kings’ crowns. |
| मंडन | आभूषण, शोभा | ornament, adornment |
| धरनी | धरती की | of the earth |
| देहि | दीजिए | grant |
| भगति | भक्ति | devotion |
| संसृति | संसाररूपी | of worldly existence |
| सरि | नदी | river |
| तरनी | पार कराने वाली नाव | a boat carrying one across |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 943
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 943, 944
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।