उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।।
मूल पाठ
भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।।
सीता चरन भरत सिरु नावा। अनुज समेत परम सुख पावा।।
स्रोत अभिलेख 7.6 · पुस्तक पृ. 913, 913
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर लक्ष्मणजी शत्रुघ्रजीसे गले लगकर मिले और इस प्रकार विरहसे उत्पन्न दु:सह दु:खका नाश किया। फिर भाई शत्रुघ्रजीसहित भरतजीने सीताजीके चरणोंमें सिर नवाया और परम सुख प्राप्त किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 913 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।।
English explanation
Then Lakshmana met Bharata’s younger brother Shatrughna, dispelling the unbearable sorrow born of separation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतानुज | भरत के छोटे भाई शत्रुघ्न से | Bharata’s younger brother Shatrughna |
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| पुनि | फिर | then |
| भेंटे | मिले | met |
| दुसह | असह्य | unbearable |
| बिरह | विरह से | from separation |
| संभव | उत्पन्न | arising |
| दुख | दुःख | sorrow |
| मेटे | मिटाए | dispelled |
2 सीता चरन भरत सिरु नावा। अनुज समेत परम सुख पावा।।
English explanation
Bharata bowed his head at Sita’s feet and, together with his younger brother, attained supreme joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता के | Sita’s |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| अनुज | छोटे भाई शत्रुघ्न | younger brother Shatrughna |
| समेत | सहित | together with |
| परम | परम | supreme |
| सुख | सुख | joy |
| पावा | पाया | attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 913
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 913, 913
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