उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगतिहि सानुकूल रघुराया। ताते तेहि डरपति अति माया।।
मूल पाठ
भगतिहि सानुकूल रघुराया। ताते तेहि डरपति अति माया।।
राम भगति निरुपम निरुपाधी। बसइ जासु उर सदा अबाधी।।
स्रोत अभिलेख 7.116 · पुस्तक पृ. 1025, 1025
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजी भक्तिके विशेष अनुकूल रहते हैं। इसीसे माया उससे अत्यन्त डरती रहती है। जिसके हृदयमें उपमारहित और उपाधिरहित (विशुद्ध) रामभक्ति सदा बिना किसी बाधा (रोक- टोक) के बसती है;॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1025 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भगतिहि सानुकूल रघुराया। ताते तेहि डरपति अति माया।।
English explanation
Rama, king of Raghu's lineage, is favorable to devotion; therefore maya greatly fears it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगतिहि | भक्ति के प्रति | toward devotion |
| सानुकूल | अनुकूल, कृपालु | favorable, gracious |
| रघुराया | रघुकुल के राजा श्रीराम | Rama, king of Raghu's lineage |
| ताते | इसलिए | therefore |
| तेहि | उस भक्ति से | that devotion |
| डरपति | डरती है | fears |
| अति | बहुत | greatly |
| माया | माया | maya, the power of illusion |
2 राम भगति निरुपम निरुपाधी। बसइ जासु उर सदा अबाधी।।
English explanation
In whose heart incomparable devotion to Rama, free from limiting conditions, always dwells unhindered—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम की | to Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| निरुपम | अनुपम, बेजोड़ | incomparable |
| निरुपाधी | उपाधियों और शर्तों से रहित | free from limiting conditions |
| बसइ | बसती है | dwells |
| जासु | जिसके | whose |
| उर | हृदय में | in the heart |
| सदा | सदा | always |
| अबाधी | बिना बाधा के | unhindered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1025
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1025
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