उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बैर न बिग्रह आस न त्रासा। सुखमय ताहि सदा सब आसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दन किसीसे वैर करे, न लड़ाई-झगड़ा करे, न आशा रखे, न भय ही करे। उसके लिये सभी दिशाएँ सदा सुखमयी हैं। जो कोई भी आरम्भ (फलकी इच्छासे कर्म) नहीं करता, जिसका कोई अपना घर नहीं है (जिसकी घरमें ममता नहीं है), जो मानहीन, पापहीन और क्रोधहीन है, जो [भक्ति करनेमें] निपुण और विज्ञानवान् है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 953 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बैर न बिग्रह आस न त्रासा। सुखमय ताहि सदा सब आसा।।
अनारंभ अनिकेत अमानी। अनघ अरोष दच्छ बिग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 7.46 · पुस्तक पृ. 952, 953
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बैर न बिग्रह आस न त्रासा। सुखमय ताहि सदा सब आसा।।
English explanation
For one who has no enmity, conflict, expectation, or fear, every direction is always full of happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैर | शत्रुता | enmity |
| न | न हो | no |
| बिग्रह | झगड़ा या विरोध | conflict or strife |
| आस | आशा या अपेक्षा | hope or expectation |
| न | न हो | no |
| त्रासा | भय | fear |
| सुखमय | सुख से भरी | full of happiness |
| ताहि | उसके लिए | for that person |
| सदा | सदा | always |
| सब | सभी | all |
| आसा | दिशाएँ | directions |
2 अनारंभ अनिकेत अमानी। अनघ अरोष दच्छ बिग्यानी।।
English explanation
Such a person undertakes no self-seeking ventures, is unattached to a dwelling, seeks no honor, and is blameless, free from anger, capable, and discerning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनारंभ | स्वार्थपूर्ण उपक्रम न करने वाला | not undertaking self-seeking ventures |
| अनिकेत | घर के मोह से मुक्त | unattached to a dwelling |
| अमानी | मान-सम्मान की चाह से रहित | not seeking honor |
| अनघ | निष्पाप | blameless |
| अरोष | क्रोधरहित | free from anger |
| दच्छ | कुशल | capable |
| बिग्यानी | विवेकपूर्ण ज्ञान वाला | possessing discerning knowledge |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 953
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 952, 953
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।