उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रीति सदा सज्जन संसर्गा। तृन सम बिषय स्वर्ग अपबर्गा।।
मूल पाठ
प्रीति सदा सज्जन संसर्गा। तृन सम बिषय स्वर्ग अपबर्गा।।
भगति पच्छ हठ नहिं सठताई। दुष्ट तर्क सब दूरि बहाई।।
स्रोत अभिलेख 7.46 · पुस्तक पृ. 952, 953
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंतजनोंके संसर्ग (सत्संग) से जिसे सदा प्रेम है, जिसके मनमें सब विषय यहाँतक कि स्वर्ग और मुक्तितक [भक्तिके सामने] तृणके समान हैं, जो भक्तिके पक्षमें हठ करता है, पर [दूसरेके मतका खण्डन करनेकी] मूर्खता नहीं करता तथा जिसने सब कुतर्कोंको दूर बहा दिया है,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 953 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रीति सदा सज्जन संसर्गा। तृन सम बिषय स्वर्ग अपबर्गा।।
English explanation
May he always love the company of the virtuous and regard sensual pleasures, heaven, and liberation as insignificant as a blade of grass.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रीति | प्रेम | love |
| सदा | सदा | always |
| सज्जन | सज्जनों की | of virtuous people |
| संसर्गा | संगति में | in the company |
| तृन | तिनका | a blade of grass |
| सम | के समान | like |
| बिषय | इंद्रिय-विषय और उनके सुख | sense objects and their pleasures |
| स्वर्ग | स्वर्ग | heaven |
| अपबर्गा | मोक्ष | liberation |
2 भगति पच्छ हठ नहिं सठताई। दुष्ट तर्क सब दूरि बहाई।।
English explanation
Remain firm in devotion without foolish obstinacy, and sweep away all malicious or unsound arguments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति के | of devotion |
| पच्छ | पक्ष में | in support |
| हठ | दृढ़ आग्रह | firm resolve |
| नहिं | न हो | without |
| सठताई | मूर्खतापूर्ण जिद | foolish obstinacy |
| दुष्ट | दुर्भावनापूर्ण या अनुचित | malicious or unsound |
| तर्क | तर्क | arguments |
| सब | सभी | all |
| दूरि | दूर | away |
| बहाई | बहाकर हटा दे | sweep away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 953
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 952, 953
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।