उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बैठ रहेसि अजगर इव पापी। सर्प होहि खल मल मति ब्यापी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअरे पापी! तू गुरुके सामने अजगरकी भाँति बैठा रहा। रे दुष्ट! तेरी बुद्धि पापसे ढक गयी है, [अत:] तू सर्प हो जा। और अरे अधमसे भी अधम! इस अधोगति (सर्पकी नीची योनि) को पाकर किसी बड़े भारी पेड़के खोखलेमें जाकर रह॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1010 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बैठ रहेसि अजगर इव पापी। सर्प होहि खल मल मति ब्यापी।।
महा बिटप कोटर महुँ जाई।।रहु अधमाधम अधगति पाई।।
स्रोत अभिलेख 7.107 · पुस्तक पृ. 1010, 1010
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बैठ रहेसि अजगर इव पापी। सर्प होहि खल मल मति ब्यापी।।
English explanation
Sinner, you remained seated like a python. Wicked one, whose mind is pervaded by impurity, become a serpent!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठ | बैठे | seated |
| रहेसि | तुम रहे | you remained |
| अजगर | अजगर | a python |
| इव | के समान | like |
| पापी | हे पापी | O sinner |
| सर्प | सर्प | a serpent |
| होहि | हो जाओ | become |
| खल | हे दुष्ट | O wicked one |
| मल | मलिनता; दोष | impurity; taint |
| मति | बुद्धि में | in the mind |
| ब्यापी | व्याप्त है | pervades |
2 महा बिटप कोटर महुँ जाई।।रहु अधमाधम अधगति पाई।।
English explanation
Lowest of the low, having fallen to a degraded state, go and dwell in the hollow of a great tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महा | बड़े; विशाल | great; large |
| बिटप | वृक्ष के | of a tree |
| कोटर | खोखले भाग | hollow |
| महुँ | में | in |
| जाई | जाकर | having gone |
| रहु | रहो | dwell |
| अधमाधम | हे अधमों में भी अधम | O lowest of the low |
| अधगति | नीच दशा; अधोगति | a degraded state |
| पाई | पाकर | having attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1010
- सहायक विषय
- गुरुजीका अपमान एवं शिवजीके शापकी बात सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1010, 1010
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।