उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे सठ गुर सन इरिषा करहीं। रौरव नरक कोटि जुग परहीं।।
मूल पाठ
जे सठ गुर सन इरिषा करहीं। रौरव नरक कोटि जुग परहीं।।
त्रिजग जोनि पुनि धरहिं सरीरा। अयुत जन्म भरि पावहिं पीरा।।
स्रोत अभिलेख 7.107 · पुस्तक पृ. 1010, 1010
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मूर्ख गुरुसे ईष्र्या करते हैं, वे करोड़ों युगोंतक रौरव नरकमें पड़े रहते हैं। फिर (वहाँसे निकलकर) वे तिर्यक् (पशु, पक्षी आदि) योनियोंमें शरीर धारण करते हैं और दस हजार जन्मोंतक दु:ख पाते रहते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1010 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे सठ गुर सन इरिषा करहीं। रौरव नरक कोटि जुग परहीं।।
English explanation
Those fools who envy their guru remain in the hell called Raurava for ten million ages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| सठ | मूर्ख | fools |
| गुर | गुरु | their spiritual teacher |
| सन | से; के प्रति | toward |
| इरिषा | ईर्ष्या | envy |
| करहीं | करते हैं | feel; practice |
| रौरव | रौरव नामक | called Raurava |
| नरक | नरक में | in hell |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| जुग | युगों तक | ages |
| परहीं | पड़े रहते हैं | remain confined |
2 त्रिजग जोनि पुनि धरहिं सरीरा। अयुत जन्म भरि पावहिं पीरा।।
English explanation
Then they take bodies in animal and similar forms of birth and suffer for ten thousand lifetimes. (‘त्रिजग’ is uncertain here; the probable intended sense is ‘तिर्यग्,’ animal life.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्रिजग | संभवतः पशु आदि की | probably animal and similar |
| जोनि | जन्म-योनियों में | in forms of birth |
| पुनि | फिर | then |
| धरहिं | धारण करते हैं | assume |
| सरीरा | शरीर | bodies |
| अयुत | दस हजार | ten thousand |
| जन्म | जन्म | lifetimes |
| भरि | भर; तक | throughout; for |
| पावहिं | पाते हैं | experience |
| पीरा | पीड़ा | suffering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1010
- सहायक विषय
- गुरुजीका अपमान एवं शिवजीके शापकी बात सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1010, 1010
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।