उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिषय अलंपट सील गुनाकर। पर दुख दुख सुख सुख देखे पर।।
मूल पाठ
बिषय अलंपट सील गुनाकर। पर दुख दुख सुख सुख देखे पर।।
सम अभूतरिपु बिमद बिरागी। लोभामरष हरष भय त्यागी।।
स्रोत अभिलेख 7.38 · पुस्तक पृ. 945, 946
भावार्थ
मूल पाठ के बादसंत विषयोंमें लम्पट (लिप्त) नहीं होते, शील और सद्गुणोंकी खान होते हैं। उन्हें पराया दु:ख देखकर दु:ख और सुख देखकर सुख होता है। वे [सबमें, सर्वत्र, सब समय] समता रखते हैं, उनके मन कोई उनका शत्रु नहीं है, वे मदसे रहित और वैराग्यवान् होते हैं तथा लोभ, क्रोध, हर्ष और भयका त्याग किये हुए रहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 945 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिषय अलंपट सील गुनाकर। पर दुख दुख सुख सुख देखे पर।।
English explanation
They are unattached to sense pleasures and are repositories of good conduct and virtues. They feel sorrow at others’ suffering and joy at others’ happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषय | इंद्रियों के भोग-विषय | objects of sensory enjoyment |
| अलंपट | आसक्त नहीं | not addicted or attached |
| सील | सदाचरण से युक्त | of good conduct |
| गुनाकर | गुणों के भंडार | repositories of virtues |
| पर | दूसरों का | others’ |
| दुख | दुःख | suffering |
| दुख | दुःखी होते हैं | feel sorrow |
| सुख | सुखी होते हैं | feel happy |
| सुख | सुख | happiness |
| देखे | देखकर | on seeing |
| पर | दूसरों का | others’ |
2 सम अभूतरिपु बिमद बिरागी। लोभामरष हरष भय त्यागी।।
English explanation
They are even-minded, bear enmity toward none, and are free from pride and attachment; they renounce greed, anger, elation, and fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सम | समभाव वाले | even-minded |
| अभूतरिपु | जिनका कोई शत्रु नहीं; निर्वैर | having no enemies; without enmity |
| बिमद | अभिमानरहित | free from pride |
| बिरागी | आसक्ति से रहित | detached |
| लोभामरष | लोभ और क्रोध | greed and anger |
| हरष | हर्ष या उछाह | elation |
| भय | डर | fear |
| त्यागी | त्याग करने वाले | those who renounce |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 945
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 946
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।