उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोमलचित दीनन्ह पर दाया। मन बच क्रम मम भगति अमाया।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनका चित्त बड़ा कोमल होता है। वे दीनोंपर दया करते हैं तथा मन, वचन और कर्मसे मेरी निष्कपट (विशुद्ध) भक्ति करते हैं। सबको सम्मान देते हैं, पर स्वयं मानरहित होते हैं। हे भरत! वे प्राणी (संतजन) मेरे प्राणोंके समान हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 946 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कोमलचित दीनन्ह पर दाया। मन बच क्रम मम भगति अमाया।।
सबहि मानप्रद आपु अमानी। भरत प्रान सम मम ते प्रानी।।
स्रोत अभिलेख 7.38 · पुस्तक पृ. 945, 946
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कोमलचित दीनन्ह पर दाया। मन बच क्रम मम भगति अमाया।।
English explanation
They are tender-hearted and compassionate toward the distressed. In thought, speech, and action, they practice sincere devotion to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोमलचित | कोमल हृदय वाले | tender-hearted |
| दीनन्ह | दीन-दुःखी लोगों | the poor and distressed |
| पर | पर; के प्रति | toward |
| दाया | दया | compassion |
| मन | मन से | in thought |
| बच | वचन से | in speech |
| क्रम | कर्म से | in action |
| मम | मेरी; राम की | my; Rama’s |
| भगति | भक्ति | devotion |
| अमाया | कपट रहित | without deceit |
2 सबहि मानप्रद आपु अमानी। भरत प्रान सम मम ते प्रानी।।
English explanation
They honor everyone but seek no honor for themselves. Bharata, such people are as dear to me as my own life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबहि | सभी को | to everyone |
| मानप्रद | सम्मान देने वाले | those who give honor |
| आपु | स्वयं | themselves |
| अमानी | अपने लिए मान न चाहने वाले | not seeking honor for themselves |
| भरत | हे भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| प्रान | प्राणों के | one’s own life |
| सम | समान | as dear as |
| मम | मेरे लिए; राम के लिए | to me; to Rama |
| ते | वे | those |
| प्रानी | जीव या व्यक्ति | beings or people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 946
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 946
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।