उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिप्र एक बैदिक सिव पूजा। करइ सदा तेहि काजु न दूजा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दएक ब्राह्मण वेदविधिसे सदा शिवजीकी पूजा करते, उन्हें दूसरा कोई काम न था। वे परम साधु और परमार्थके ज्ञाता थे, वे शम्भुके उपासक थे, पर श्रीहरिकी निन्दा करनेवाले न थे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1007 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिप्र एक बैदिक सिव पूजा। करइ सदा तेहि काजु न दूजा।।
परम साधु परमारथ बिंदक। संभु उपासक नहिं हरि निंदक।।
स्रोत अभिलेख 7.105 · पुस्तक पृ. 1007, 1008
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिप्र एक बैदिक सिव पूजा। करइ सदा तेहि काजु न दूजा।।
English explanation
A Brahmin versed in the Vedas constantly worshipped Shiva; he had no other occupation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmin |
| एक | एक | a certain |
| बैदिक | वेदों का ज्ञाता | versed in the Vedas |
| सिव | शिव की | of Shiva |
| पूजा | पूजा | worship |
| करइ | करता था | performed |
| सदा | सदा | always |
| तेहि | उस ब्राह्मण का | that Brahmin's |
| काजु | कार्य | occupation |
| न | नहीं | no |
| दूजा | दूसरा | other |
2 परम साधु परमारथ बिंदक। संभु उपासक नहिं हरि निंदक।।
English explanation
He was deeply virtuous and knew the highest spiritual truth. He worshipped Shiva but did not disparage Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | supremely |
| साधु | सज्जन और संतस्वभाव | virtuous and saintly |
| परमारथ | परम आध्यात्मिक सत्य का | of the highest spiritual truth |
| बिंदक | ज्ञाता | knower |
| संभु | शिव का | of Shiva |
| उपासक | उपासक | worshipper |
| नहिं | नहीं | not |
| हरि | हरि अर्थात विष्णु का | of Hari, Vishnu |
| निंदक | निंदा करने वाला | a detractor |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1007
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1007, 1008
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।