उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिप्रन्ह दान बिबिध बिधि दीन्हे। जाचक सकल अजाचक कीन्हे।।
मूल पाठ
बिप्रन्ह दान बिबिध बिधि दीन्हे। जाचक सकल अजाचक कीन्हे।।
सिंघासन पर त्रिभुअन साई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाईं।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 919, 919
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने ब्राह्मणोंको अनेकों प्रकारके दान दिये और सम्पूर्ण याचकोंको अयाचक बना दिया (मालामाल कर दिया)। त्रिभुवनके स्वामी श्रीरामचन्द्रजीको [अयोध्याके] सिंहासनपर [विराजित] देखकर देवताओंने नगाड़े बजाये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 919 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिप्रन्ह दान बिबिध बिधि दीन्हे। जाचक सकल अजाचक कीन्हे।।
English explanation
Gifts were given to the Brahmins in many ways. All those who sought gifts were given enough that they no longer needed to ask.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रन्ह | ब्राह्मणों को | to the Brahmins |
| दान | दान | gifts |
| बिबिध | अनेक | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| दीन्हे | दिए | gave |
| जाचक | याचकों को | those seeking gifts |
| सकल | सभी | all |
| अजाचक | जिन्हें अब माँगने की जरूरत न रही | no longer needing to ask |
| कीन्हे | बना दिया | made |
2 सिंघासन पर त्रिभुअन साई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाईं।।
English explanation
Seeing Rama, lord of the three worlds, upon the throne, the gods sounded kettledrums.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंघासन | सिंहासन | the throne |
| पर | पर | upon |
| त्रिभुअन | तीनों लोकों के | of the three worlds |
| साई | स्वामी राम | the lord, Rama |
| देखि | देखकर | having seen |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| दुंदुभीं | दुंदुभियाँ, नगाड़े | kettledrums |
| बजाईं | बजाईं | sounded |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 919
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 919, 919
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।