उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रथम तिलक बसिष्ट मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा।।
मूल पाठ
प्रथम तिलक बसिष्ट मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा।।
सुत बिलोकि हरषीं महतारी। बार बार आरती उतारी।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 919, 919
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[सबसे] पहले मुनि वसिष्ठजीने तिलक किया। फिर उन्होंने सब ब्राह्मणोंको [तिलक करनेकी] आज्ञा दी। पुत्रको राजसिंहासनपर देखकर माताएँ हर्षित हुईं और उन्होंने बार-बार आरती उतारी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 919 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रथम तिलक बसिष्ट मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा।।
English explanation
First, sage Vashishtha applied Rama's coronation mark. Then he gave all the Brahmins permission to do likewise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | first |
| तिलक | राजतिलक | coronation mark |
| बसिष्ट | वसिष्ठ | Vashishtha, Rama's family preceptor |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| कीन्हा | किया | performed |
| पुनि | फिर | then |
| सब | सभी | all |
| बिप्रन्ह | ब्राह्मणों को | to the Brahmins |
| आयसु | आज्ञा, अनुमति | permission |
| दीन्हा | दी | gave |
2 सुत बिलोकि हरषीं महतारी। बार बार आरती उतारी।।
English explanation
Seeing their son, the mothers rejoiced and repeatedly performed the arati ceremony.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र राम को | their son Rama |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| हरषीं | प्रसन्न हुईं | rejoiced |
| महतारी | माताएँ | the mothers |
| बार | बार | time |
| बार | बार; बार-बार | after time; repeatedly |
| आरती | आरती | arati, ceremonial waving of lights |
| उतारी | उतारी, की | performed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 919
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 919, 919
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