उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनु तप तेज कि कर बिस्तारा। जल बिनु रस कि होइ संसारा।।
मूल पाठ
बिनु तप तेज कि कर बिस्तारा। जल बिनु रस कि होइ संसारा।।
सील कि मिल बिनु बुध सेवकाई। जिमि बिनु तेज न रूप गोसाई।।
स्रोत अभिलेख 7.9 · पुस्तक पृ. 992, 992
भावार्थ
मूल पाठ के बादतपके बिना क्या तेज फैल सकता है? जल-तत्त्वके बिना संसारमें क्या रस हो सकता है? पण्डितजनोंकी सेवा बिना क्या शील (सदाचार) प्राप्त हो सकता है? हे गोसाईं! जैसे बिना तेज (अग्रि-तत्त्व) के रूप नहीं मिलता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 992 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिनु तप तेज कि कर बिस्तारा। जल बिनु रस कि होइ संसारा।।
English explanation
Can spiritual radiance expand without austerity? Can taste exist in the world without water?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| तप | तपस्या | austerity |
| तेज | आध्यात्मिक तेज | spiritual radiance |
| कि | क्या | can …? |
| कर | करता है | makes |
| बिस्तारा | विस्तार | expansion |
| जल | पानी | water |
| बिनु | बिना | without |
| रस | स्वाद | taste |
| कि | क्या | can …? |
| होइ | होता है | exist |
| संसारा | संसार में | in the world |
2 सील कि मिल बिनु बुध सेवकाई। जिमि बिनु तेज न रूप गोसाई।।
English explanation
Can good character be acquired without serving the wise? Just as visible form cannot exist without light, O lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सील | शील और सदाचार | good character |
| कि | क्या | can …? |
| मिल | मिलता है | be acquired |
| बिनु | बिना | without |
| बुध | ज्ञानी जनों की | of the wise |
| सेवकाई | सेवा | service |
| जिमि | जैसे | just as |
| बिनु | बिना | without |
| तेज | प्रकाश अथवा अग्नितत्त्व | light or the fire element |
| न | नहीं | no |
| रूप | दृश्य रूप | visible form |
| गोसाई | हे स्वामी | O lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 992
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 992, 992
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।