उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज सुख बिनु मन होइ कि थीरा। परस कि होइ बिहीन समीरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनिज-सुख (आत्मानन्द) के बिना क्या मन स्थिर हो सकता है? वायु-तत्त्वके बिना क्या स्पर्श हो सकता है? क्या विश्वासके बिना कोई भी सिद्धि हो सकती है? इसी प्रकार श्रीहरिके भजन बिना जन्म-मृत्युके भयका नाश नहीं होता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 992 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निज सुख बिनु मन होइ कि थीरा। परस कि होइ बिहीन समीरा।।
कवनिउ सिद्धि कि बिनु बिस्वासा। बिनु हरि भजन न भव भय नासा।।
स्रोत अभिलेख 7.9 · पुस्तक पृ. 992, 992
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निज सुख बिनु मन होइ कि थीरा। परस कि होइ बिहीन समीरा।।
English explanation
Can the mind become steady without inner happiness? Can touch exist without air?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने भीतर का | one’s own inner |
| सुख | सुख | happiness |
| बिनु | बिना | without |
| मन | मन | the mind |
| होइ | होता है | becomes |
| कि | क्या | can …? |
| थीरा | स्थिर | steady |
| परस | स्पर्श | touch |
| कि | क्या | can …? |
| होइ | होता है | exist |
| बिहीन | के बिना | without |
| समीरा | वायु | air |
2 कवनिउ सिद्धि कि बिनु बिस्वासा। बिनु हरि भजन न भव भय नासा।।
English explanation
Can any attainment occur without faith? Without devotion to Hari, the fear of worldly existence is not destroyed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवनिउ | कोई भी | any whatsoever |
| सिद्धि | सिद्धि या सफलता | attainment or success |
| कि | क्या | can there be …? |
| बिनु | बिना | without |
| बिस्वासा | विश्वास | faith |
| बिनु | बिना | without |
| हरि | भगवान हरि का | to Lord Hari |
| भजन | भजन और उपासना | devotional worship |
| न | नहीं | not |
| भव | संसार का | of worldly existence |
| भय | भय | fear |
| नासा | नाश होता | is destroyed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 992
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 992, 992
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