उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरनि न जाइ रुचिर अँगनाई। जहँ खेलहिं नित चारिउ भाई।।
मूल पाठ
बरनि न जाइ रुचिर अँगनाई। जहँ खेलहिं नित चारिउ भाई।।
बालबिनोद करत रघुराई। बिचरत अजिर जननि सुखदाई।।
स्रोत अभिलेख 7.76 · पुस्तक पृ. 979, 979
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुन्दर आँगनका वर्णन नहीं किया जा सकता, जहाँ चारों भाई नित्य खेलते हैं। माताको सुख देनेवाले बालविनोद करते हुए श्रीरघुनाथजी आँगनमें विचर रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 979 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बरनि न जाइ रुचिर अँगनाई। जहँ खेलहिं नित चारिउ भाई।।
English explanation
The lovely courtyard, where all four brothers play daily, is beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| रुचिर | सुंदर | lovely |
| अँगनाई | आँगन | courtyard |
| जहँ | जहाँ | where |
| खेलहिं | खेलते हैं | play |
| नित | प्रतिदिन | daily |
| चारिउ | चारों | all four |
| भाई | भाई—राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न | brothers—Rama, Bharata, Lakshmana, and Shatrughna |
2 बालबिनोद करत रघुराई। बिचरत अजिर जननि सुखदाई।।
English explanation
Rama, lord of Raghu’s line, plays childhood games and moves about the courtyard, bringing joy to his mother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालबिनोद | बाल-क्रीड़ाएँ | childhood games |
| करत | करते हैं | performs |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| बिचरत | घूमते हैं | moves about |
| अजिर | आँगन में | in the courtyard |
| जननि | माता को | to his mother |
| सुखदाई | सुख देने वाले | bringing joy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 979
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 979, 979
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