उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फूलहिं फरहिं सदा तरु कानन। रहहि एक सँग गज पंचानन।।
मूल पाठ
फूलहिं फरहिं सदा तरु कानन। रहहि एक सँग गज पंचानन।।
खग मृग सहज बयरु बिसराई। सबन्हि परस्पर प्रीति बढ़ाई।।
स्रोत अभिलेख 7.23 · पुस्तक पृ. 932, 933
भावार्थ
मूल पाठ के बादवनोंमें वृक्ष सदा फूलते और फलते हैं। हाथी और सिंह [वैर भूलकर] एक साथ रहते हैं। पक्षी और पशु सभीने स्वाभाविक वैर भुलाकर आपसमें प्रेम बढ़ा लिया है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 932 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 फूलहिं फरहिं सदा तरु कानन। रहहि एक सँग गज पंचानन।।
English explanation
The forest trees always blossom and bear fruit. Elephants and lions live together.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फूलहिं | फूलते हैं | blossom |
| फरहिं | फलते हैं | bear fruit |
| सदा | सदा | always |
| तरु | वृक्ष | trees |
| कानन | वनों में | in the forests |
| रहहि | रहते हैं | live |
| एक | एक ही | one and the same |
| सँग | साथ | together |
| गज | हाथी | elephants |
| पंचानन | सिंह | lions |
2 खग मृग सहज बयरु बिसराई। सबन्हि परस्पर प्रीति बढ़ाई।।
English explanation
Birds and animals forgot their natural enmity, and all increased their mutual affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| बयरु | वैर | enmity |
| बिसराई | भुलाकर | having forgotten |
| सबन्हि | सबने | all of them |
| परस्पर | एक-दूसरे के प्रति | toward one another |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| बढ़ाई | बढ़ाया | increased |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 932
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 932, 933
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।