उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रातकाल सरऊ करि मज्जन। बैठहिं सभाँ संग द्विज सज्जन।।
मूल पाठ
प्रातकाल सरऊ करि मज्जन। बैठहिं सभाँ संग द्विज सज्जन।।
बेद पुरान बसिष्ट बखानहिं। सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.26 · पुस्तक पृ. 935, 935
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रात:काल सरयूजीमें स्नान करके ब्राह्मणों और सज्जनोंके साथ सभामें बैठते हैं। वसिष्ठजी वेद और पुराणोंकी कथाएँ वर्णन करते हैं और श्रीरामजी सुनते हैं, यद्यपि वे सब जानते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 935 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रातकाल सरऊ करि मज्जन। बैठहिं सभाँ संग द्विज सज्जन।।
English explanation
In the morning, after bathing in the Sarayu, Rama sits in the assembly with Brahmins and good people.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रातकाल | प्रातःकाल में | in the morning |
| सरऊ | सरयू नदी में | in the Sarayu River |
| करि | करके | having performed |
| मज्जन | स्नान | bathing |
| बैठहिं | बैठते हैं | sits |
| सभाँ | सभा में | in the assembly |
| संग | साथ | with |
| द्विज | ब्राह्मण | Brahmins |
| सज्जन | सज्जन लोग | good people |
2 बेद पुरान बसिष्ट बखानहिं। सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिं।।
English explanation
Vasishtha expounds the Vedas and Puranas; Rama listens, although he knows everything.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेद | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| बसिष्ट | गुरु वसिष्ठ | Vasishtha, the royal preceptor |
| बखानहिं | वर्णन करते हैं | expounds |
| सुनहिं | सुनते हैं | listens |
| राम | श्रीराम | Rama |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| सब | सब कुछ | everything |
| जानहिं | जानते हैं | knows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 935
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 935, 935
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