उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु अवतार कथा पुनि गाई। तब सिसु चरित कहेसि मन लाई।।
मूल पाठ
प्रभु अवतार कथा पुनि गाई। तब सिसु चरित कहेसि मन लाई।।
स्रोत अभिलेख 7.64 · पुस्तक पृ. 968, 968
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर प्रभुके अवतारकी कथा वर्णन की। तदनन्तर मन लगाकर श्रीरामजीकी बाललीलाएँ कहीं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 968 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रभु अवतार कथा पुनि गाई। तब सिसु चरित कहेसि मन लाई।।
English explanation
Next he sang the story of Lord Rama’s incarnation, and then attentively recounted his childhood deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु श्रीराम के | of Lord Rama |
| अवतार | अवतार की | of the incarnation |
| कथा | कथा | story |
| पुनि | फिर | next |
| गाई | गाई | sang |
| तब | तब; उसके बाद | then |
| सिसु | बाल्यकाल के | of childhood |
| चरित | चरित्र; कार्यों का वृत्तांत | deeds; account of actions |
| कहेसि | उन्होंने वर्णन किया | he recounted |
| मन | मन; ध्यान | mind; attention |
| लाई | लगाकर | applying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 968
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 968, 968
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