उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रबल अबिद्या तम मिटि जाई। हारहिं सकल सलभ समुदाई।।
मूल पाठ
प्रबल अबिद्या तम मिटि जाई। हारहिं सकल सलभ समुदाई।।
खल कामादि निकट नहिं जाहीं। बसइ भगति जाके उर माहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उसके प्रकाशसे] अविद्याका प्रबल अन्धकार मिट जाता है। मदादि पतंगोंका सारा समूह हार जाता है। जिसके हृदयमें भक्ति बसती है, काम, क्रोध और लोभ आदि दुष्ट तो उसके पास भी नहीं जाते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1031 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रबल अबिद्या तम मिटि जाई। हारहिं सकल सलभ समुदाई।।
English explanation
The dense darkness of ignorance vanishes, and all swarms of moths are defeated.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रबल | प्रबल, घना | powerful, dense |
| अबिद्या | अविद्या का | of spiritual ignorance |
| तम | अंधकार | darkness |
| मिटि | मिट | vanishes |
| जाई | जाता है | away |
| हारहिं | परास्त होते हैं | are defeated |
| सकल | सभी | all |
| सलभ | पतंगों के | of moths |
| समुदाई | समूह | swarms |
2 खल कामादि निकट नहिं जाहीं। बसइ भगति जाके उर माहीं।।
English explanation
The evil passions, lust and the rest, do not approach anyone in whose heart devotion dwells.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खल | दुष्ट | wicked |
| कामादि | काम आदि विकार | lust and other passions |
| निकट | पास | near |
| नहिं | नहीं | not |
| जाहीं | जाते हैं | go |
| बसइ | बसती है | dwells |
| भगति | भक्ति | devotion |
| जाके | जिसके | whose |
| उर | हृदय | heart |
| माहीं | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1031
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।