उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम प्रकास रूप दिन राती। नहिं कछु चहिअ दिआ घृत बाती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह दिन-रात [अपने-आप ही] परम प्रकाशरूप रहता है। उसको दीपक, घी और बत्ती कुछ भी नहीं चाहिये। [इस प्रकार मणिका एक तो स्वाभाविक प्रकाश रहता है] फिर मोहरूपी दरिद्रता समीप नहीं आती [क्योंकि मणि स्वयं धनरूप है]; और [तीसरे] लोभरूपी हवा उस मणिमय दीपको बुझा नहीं सकती, [क्योंकि मणि स्वयं प्रकाशरूप है, वह किसी दूसरेकी सहायतासे नहीं प्रकाश करती]॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1031 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
परम प्रकास रूप दिन राती। नहिं कछु चहिअ दिआ घृत बाती।।
मोह दरिद्र निकट नहिं आवा। लोभ बात नहिं ताहि बुझावा।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 परम प्रकास रूप दिन राती। नहिं कछु चहिअ दिआ घृत बाती।।
English explanation
It is supreme radiance day and night; it needs no lamp, ghee, or wick.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | परम | supreme |
| प्रकास | प्रकाश | radiance |
| रूप | स्वरूप | embodiment |
| दिन | दिन | day |
| राती | रात | night |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| चहिअ | चाहिए | is needed |
| दिआ | दीपक | lamp |
| घृत | घी | clarified butter |
| बाती | बत्ती | wick |
2 मोह दरिद्र निकट नहिं आवा। लोभ बात नहिं ताहि बुझावा।।
English explanation
The poverty of delusion does not approach, and the wind of greed cannot extinguish its light.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह | मोह रूपी | of delusion |
| दरिद्र | दरिद्रता | poverty |
| निकट | पास | near |
| नहिं | नहीं | not |
| आवा | आती है | comes |
| लोभ | लोभ रूपी | of greed |
| बात | हवा | wind |
| नहिं | नहीं | not |
| ताहि | उस मणि के प्रकाश को | its light |
| बुझावा | बुझाती है | extinguishes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1031
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।