उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई। सुनहु भगति मनि कै प्रभुताई।।
मूल पाठ
कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई। सुनहु भगति मनि कै प्रभुताई।।
राम भगति चिंतामनि सुंदर। बसइ गरुड़ जाके उर अंतर।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैंने ज्ञानका सिद्धान्त समझाकर कहा। अब भक्तिरूपी मणिकी प्रभुता (महिमा) सुनिये। श्रीरामजीकी भक्ति सुन्दर चिन्तामणि है। हे गरुडज़ी! यह जिसके हृदयके अंदर बसती है,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1030 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई। सुनहु भगति मनि कै प्रभुताई।।
English explanation
I have explained the principle of knowledge. Now hear the greatness of the jewel of devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउँ | मैंने कहा | I have explained |
| ग्यान | ज्ञान का | of spiritual knowledge |
| सिद्धांत | मूल सिद्धांत | fundamental principle |
| बुझाई | समझाकर | having explained |
| सुनहु | सुनो | listen |
| भगति | भक्ति रूपी | of devotion |
| मनि | मणि | jewel |
| कै | की | of |
| प्रभुताई | महिमा | greatness |
2 राम भगति चिंतामनि सुंदर। बसइ गरुड़ जाके उर अंतर।।
English explanation
O Garuda, devotion to Rama is a beautiful wish-fulfilling jewel; in whoever's heart it dwells—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | to Lord Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| चिंतामनि | मनोकामना पूरी करने वाली मणि | wish-fulfilling jewel |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| बसइ | बसती है | dwells |
| गरुड़ | हे गरुड़, पक्षिराज | O Garuda, king of birds |
| जाके | जिसके | whose |
| उर | हृदय के | heart's |
| अंतर | भीतर | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1030
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।