उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रकृति पार प्रभु सब उर बासी। ब्रह्म निरीह बिरज अबिनासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रकृतिसे परे, प्रभु (सर्वसमर्थ), सदा सबके हृदयमें बसनेवाले, इच्छारहित, विकाररहित, अविनाशी ब्रह्म हैं। यहाँ (श्रीराममें) मोहका कारण ही नहीं है। क्या अन्धकारका समूह कभी सूर्यके सामने जा सकता है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 975 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रकृति पार प्रभु सब उर बासी। ब्रह्म निरीह बिरज अबिनासी।।
इहाँ मोह कर कारन नाहीं। रबि सन्मुख तम कबहुँ कि जाहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.72 · पुस्तक पृ. 975, 975
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रकृति पार प्रभु सब उर बासी। ब्रह्म निरीह बिरज अबिनासी।।
English explanation
The Lord is beyond material nature and dwells in every heart; he is Brahman, free from desire, pure, and imperishable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रकृति | प्रकृति; भौतिक सृष्टि का आधार | material nature |
| पार | से परे | beyond |
| प्रभु | स्वामी; भगवान | the Lord |
| सब | सभी के | of all |
| उर | हृदय | hearts |
| बासी | निवास करने वाले | dwelling in |
| ब्रह्म | परम सत्य ब्रह्म | Brahman, ultimate reality |
| निरीह | इच्छा और स्पृहा से रहित | free from desire or craving |
| बिरज | निर्मल; रज और कलुष से रहित | pure; free from stain |
| अबिनासी | नाशरहित | imperishable |
2 इहाँ मोह कर कारन नाहीं। रबि सन्मुख तम कबहुँ कि जाहीं।।
English explanation
There is no cause for delusion in such a Lord. Can darkness ever approach the sun?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | यहाँ; ऐसे प्रभु में | here; in such a Lord |
| मोह | भ्रम; अज्ञानजनित मोह | delusion |
| कर | का | of |
| कारन | कारण | cause |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| रबि | सूर्य | the sun |
| सन्मुख | के सामने | before; in the presence of |
| तम | अंधकार | darkness |
| कबहुँ | कभी | ever |
| कि | क्या | can … ? |
| जाहीं | जा सकता है | can go; can approach |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 975
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 975, 975
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।