उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि कृपाल पुर बाहेर गए। गज रथ तुरग मगावत भए।।
मूल पाठ
पुनि कृपाल पुर बाहेर गए। गज रथ तुरग मगावत भए।।
देखि कृपा करि सकल सराहे। दिए उचित जिन्ह जिन्ह तेइ चाहे।।
स्रोत अभिलेख 7.5 · पुस्तक पृ. 956, 956
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर फिर कृपालु श्रीरामजी नगरके बाहर गये और वहाँ उन्होंने हाथी, रथ और घोड़े मँगवाये। उन्हें देखकर, कृपा करके प्रभुने सबकी सराहना की और उनको जिस-जिसने चाहा, उस-उसको उचित जानकर दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 956 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुनि कृपाल पुर बाहेर गए। गज रथ तुरग मगावत भए।।
English explanation
Then compassionate Rama went outside the city and had elephants, chariots, and horses brought.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| कृपाल | कृपालु राम | compassionate Rama |
| पुर | नगर के | the city |
| बाहेर | बाहर | outside |
| गए | गए | went |
| गज | हाथी | elephants |
| रथ | रथ | chariots |
| तुरग | घोड़े | horses |
| मगावत | मँगवाने | having brought |
| भए | लगे | began |
2 देखि कृपा करि सकल सराहे। दिए उचित जिन्ह जिन्ह तेइ चाहे।।
English explanation
Seeing them, Rama graciously praised them all and suitably gave each person what they desired.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen them |
| कृपा | कृपा | kindness |
| करि | करके | showing |
| सकल | सबको | all of them |
| सराहे | सराहा | praised |
| दिए | दिए | gave |
| उचित | उचित रूप से | appropriately |
| जिन्ह | जिस-जिसने | whoever |
| जिन्ह | जिस-जिसने | each respective person |
| तेइ | वे ही वस्तुएँ | those very things |
| चाहे | चाहीं | desired |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 956
- सहायक विषय
- नारदजीका आना और स्तुति करके ब्रह्मलोकको लौट जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 956, 956
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।