उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि मुनि बसिष्ट गृह आए। कृपासिंधु के मन अति भाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा कहकर मुनि वसिष्ठजी घर आये। वे कृपासागर श्रीरामजीके मनको बहुत ही अच्छे लगे। तदनन्तर सेवकोंको सुख देनेवाले श्रीरामजीने हनुमान्जी तथा भरतजी आदि भाइयोंको साथ लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 956 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस कहि मुनि बसिष्ट गृह आए। कृपासिंधु के मन अति भाए।।
हनूमान भरतादिक भ्राता। संग लिए सेवक सुखदाता।।
स्रोत अभिलेख 7.5 · पुस्तक पृ. 956, 956
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस कहि मुनि बसिष्ट गृह आए। कृपासिंधु के मन अति भाए।।
English explanation
Having said this, sage Vashishtha returned home. He greatly pleased Rama, the ocean of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| मुनि | मुनि | sage |
| बसिष्ट | वसिष्ठ, राम के गुरु | Vashishtha, Rama’s preceptor |
| गृह | अपने घर | home |
| आए | लौट आए | returned |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर राम | Rama, the ocean of compassion |
| के | के | of |
| मन | मन को | to the heart |
| अति | बहुत | greatly |
| भाए | प्रिय लगे | were pleasing |
2 हनूमान भरतादिक भ्राता। संग लिए सेवक सुखदाता।।
English explanation
Rama, who brings happiness to his servants, took Hanuman and his brothers, including Bharata, along.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हनूमान | हनुमान, राम के भक्त | Hanuman, Rama’s devotee |
| भरतादिक | भरत आदि | Bharata and the others |
| भ्राता | भाइयों को | brothers |
| संग | साथ | along |
| लिए | ले लिया | took |
| सेवक | सेवकों को | to his servants |
| सुखदाता | सुख देने वाले राम | Rama, the giver of happiness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 956
- सहायक विषय
- नारदजीका आना और स्तुति करके ब्रह्मलोकको लौट जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 956, 956
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