उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पर हित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।।
मूल पाठ
पर हित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।।
निर्नय सकल पुरान बेद कर। कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर।।
स्रोत अभिलेख 7.41 · पुस्तक पृ. 948, 949
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे भाई! दूसरोंकी भलाईके समान कोई धर्म नहीं है और दूसरोंको दु:ख पहुँचानेके समान कोई नीचता (पाप) नहीं है। हे तात! समस्त पुराणों और वेदोंका यह निर्णय (निश्चित सिद्धान्त) मैंने तुमसे कहा है, इस बातको पण्डितलोग जानते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 948 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पर हित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।।
English explanation
AI draft: Brother, no righteousness equals benefiting others, and no wickedness equals causing others pain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों का | others’ |
| हित | कल्याण | welfare |
| सरिस | के समान | equal to |
| धर्म | धर्म | righteousness |
| नहिं | नहीं है | there is none |
| भाई | हे भाई | O brother |
| पर | दूसरों को | to others |
| पीड़ा | पीड़ा देना | causing pain |
| सम | के समान | equal to |
| नहिं | नहीं है | there is none |
| अधमाई | नीचता | wickedness |
2 निर्नय सकल पुरान बेद कर। कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर।।
English explanation
Dear one, I have stated the conclusion of all the Puranas and Vedas; learned people know it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निर्नय | निष्कर्ष | conclusion |
| सकल | सभी | all |
| पुरान | पुराणों | the Puranas |
| बेद | वेदों | the Vedas |
| कर | का | of |
| कहेउँ | मैंने कहा है | I have stated |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| जानहिं | जानते हैं | know |
| कोबिद | विद्वान | learned |
| नर | लोग | people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 948
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 948, 949
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।