उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पति अनुकूल सदा रह सीता। सोभा खानि सुसील बिनीता।।
मूल पाठ
पति अनुकूल सदा रह सीता। सोभा खानि सुसील बिनीता।।
जानति कृपासिंधु प्रभुताई। सेवति चरन कमल मन लाई।।
स्रोत अभिलेख 7.24 · पुस्तक पृ. 933, 934
भावार्थ
मूल पाठ के बादशोभाकी खान, सुशील और विनम्र सीताजी सदा पतिके अनुकूल रहती हैं। वे कृपासागर श्रीरामजीकी प्रभुता (महिमा) को जानती हैं और मन लगाकर उनके चरणकमलोंकी सेवा करती हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 933 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पति अनुकूल सदा रह सीता। सोभा खानि सुसील बिनीता।।
English explanation
Sita, a treasury of beauty, virtuous and humble, always remains in harmony with her husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पति | अपने पति के | with her husband |
| अनुकूल | अनुकूल | in harmony |
| सदा | सदा | always |
| रह | रहती हैं | remains |
| सीता | राम की पत्नी सीता | Sita, Rama's wife |
| सोभा | शोभा की | of beauty |
| खानि | खान; भंडार | mine; treasury |
| सुसील | सुशील | virtuous and well-mannered |
| बिनीता | विनम्र | humble |
2 जानति कृपासिंधु प्रभुताई। सेवति चरन कमल मन लाई।।
English explanation
Sita knows the majesty of Rama, the ocean of compassion, and serves his lotus feet with devoted attention.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानति | जानती हैं | knows |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर राम की | of Rama, the ocean of compassion |
| प्रभुताई | प्रभुता; महिमा | lordship; majesty |
| सेवति | सेवा करती हैं | serves |
| चरन | चरण | feet |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| मन | मन | mind |
| लाई | लगाकर | applying devotedly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 933
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 933, 934
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